Saturday, 8 June 2013

मुझे मत जलाओ .....

 मुझे मत जलाओ .....
तपन की तेज़ रश्मियाँ
जेठ की तपती दोपहरी में
मुझे मत जलाओ
मैं जल रही हूँ विरहाग्नि में
प्रियतम के अकूट प्रेम में
बुला सको तो उन्हें बुलाओ .....
मुझे मत जलाओ ...
.....
मनहर बोलो !!!
तुम कब आओगे
फ़िर हम गुनगुनायेंगे
प्रेम गीत गायेंगे
फ़िर नैन से नैनों का नमन
मुझे मत जलाओ ....
......
होगा हाथों में हाथ
दरिया किनारे
अविरल प्रवाहित धारा में
पैरों की थपथपाहट
फुहारों की बूंदे चेहरे पर
बरबस ही मोह लेती हैं
मैपलकों से पोछ दूँ उन्हें ....
मुझे मत जलाओ ....
.......
वो पीपल की छैयाँ
वो पत्तों का खिलखिलाना
खडकना , चरमराना
वो अंतहीन गुफ़्तगू
लबों की कपकपाहट
वो बढ़ा हुआ रक्त -संचार
मुझे मत जलाओ ....
......
जब शाम सुहानी होती है
परिन्दों की कतारे
आसमां संजोती है
सिन्दूरी किरने
दरिया निगलती है
तुम्हारा आभास
अपने आस -पास होता है
क्या ये स्वर्ग वाले दिन
कभी आयेंगे ....
मुझे मत जलाओ ....
......
हर बार मुड़ -मुड़ देखूं
पलटकर बारम्बार
शायद चुपके से आ जाओ तुम
सच -सच बोलो
कब आओगे मनहर
मुझे मत जलाओ .....
 

Thursday, 23 May 2013

मौन भी अलंकृत करता है मुझे
जब तुम होते हो पास
तुम्हारे होने की अनुभूति से
मन लहरों सा चंचल
तरंगों सा तरंगित
सिन्दूरी किरणों को
समेटती लहरे
एसे ही तुम्हे
आगोश में लेने की लालसा
तुम्हारे लिए चाहत एक पन्ना
मेरे लिए पूरा एक ग्रन्थ
जिसके हर लम्हों को
सजाया है आँचल में
तुम संग बिताये पलों की
यादों से भरा ये ग्रन्थ
मेरे जीने का मकसद
जब भी तन्हा होती
उलट लेती हूँ कुछ पन्नों कों
और नजदीक होती हूँ आपके
Photo: मौन भी अलंकृत करता है  मुझे 
जब तुम होते हो पास 
तुम्हारे होने की अनुभूति से 
मन लहरों सा चंचल 
तरंगों सा तरंगित 
सिन्दूरी किरणों को 
समेटती लहरे 
एसे ही तुम्हे 
आगोश में लेने की लालसा 
तुम्हारे लिए चाहत एक पन्ना 
मेरे लिए पूरा एक ग्रन्थ 
जिसके हर लम्हों को 
सजाया है आँचल में 
तुम संग बिताये पलों की 
यादों से भरा ये ग्रन्थ 
मेरे जीने का मकसद  
जब भी तन्हा  होती 
उलट लेती हूँ कुछ पन्नों कों 
और नजदीक होती हूँ आपके2

Tuesday, 21 May 2013


विश्वास के बदले विश्वास
और मोहब्बत के बदले
मोहब्बत मिले
ये जरुरी तो नही
बहुत खुदकिस्मत हैं वे
जिन्हें ये नसीब
और जिन्हें ना
वो इसका स्वाद ही क्या जाने
क्या पहचाने
इसकी दीवानगी
और सारी जिन्दगी यूँ ही
तन्हा बिता देंगे
पछ्तायेगें रोयेंगे काश !!!
हम उन पलों को समेट पाते
जो रेत की तरह हाथों से फिसल गए ....

Wednesday, 15 May 2013


Thursday, 9 May 2013