Wednesday, 20 August 2014

जिये कुछ इस तरह
की कल भी जीवित रहना है ,
करो कुछ इस तरह
की कल ही मर जाना है। 



यादों का सिलसिला ~~
बार - बार चला जाता है
क्यूँ ???
बीते कल की ओर
और
बेसाख्ता !!!
इन नयनन में
नमी ,
कुछ ख़ुशी की
कुछ गम की 
कुछ आशायें !!!
आने वाले कल की 



कुछ रिश्ते बनायें रब ने
कुछ रिश्तें बनायें लोगों ने
वे रिश्ते मगर ख़ास
जो रिश्ता निभाये रिश्तों के बिना.......
तुम बिन जीवन बीतेगा नही
हौले - हौले से कह गयी अब
मौसम की पहली फ़ुहार !!!







अपने वारुणी नयनों से
निहारूंगी तुम्हें
बस
मेरे घर
दबे पाओं चुपचाप चले आओ !!!
ना मन में आओ ,
न स्पंदन बढाओ
ना साँसों से महकाओ
बस और बस ,
चुपचाप चले आओ !!!

============== वंदना दुबे


ऊंचाई वो ,
जहाँ से अपने भी नज़र आयें
यादें वो ,
वो तनहायी में साथ निभाएं
अच्छायी वो ,
जो बिगड़े संबंधों को बनाये
और सालों - साल निभाये !!!
ना पूछ मुझसे कि
मेरी मंजिल कहाँ तक है
अभी तो सफ़र का इरादा किया है ,
ना हारेंगे हौसला
उम्र भर
ये मैंने किसी से नही
अपने से कहा है !!!
आ गया घनकाल ~~~~
घनघोर
घन - घन करते
घिरे - घनरस
घनन - घनन
टप - टप 
टपाटप
श्रृंगारित हुए पात - पात
भीगा मन मेरा भी ~~~

Saturday, 2 August 2014


इंद्रधनुषी भोर
ताज़गी भरा सवेरा
तेरी यादों ने
लो फिर
डाला है डेरा !!!
अरुण आभा की 
मुस्कराहट
चहुंओर छायी
लो फिर एक
पुलकित प्रफ्फुलित उल्लासित
बिहान आई !!!
 — 
Photo: इंद्रधनुषी भोर 
ताज़गी भरा सवेरा 
तेरी यादों ने
 लो फिर 
डाला है डेरा !!!
अरुण आभा की 
मुस्कराहट 
चहुंओर छायी 
लो फिर एक 
पुलकित प्रफ्फुलित उल्लासित
बिहान आई !!!

" प्रेम " मन को अलंकृत करता है। कनक सी चमक, अलौकिक दिव्यता और मन का आवरण है , प्रेम में रहना या जीना एक शाश्वत अतुल्य आनंद का अनुभव है, यह व्यक्तित्व की शुद्धतम स्थिति, जिसमें संवेदनायें - भावनायें एक दूसरे से जुड़ी रहती है, भावों को समझनेकी परख होनी चाहिये। प्रेम मौन भी हो तो दॄष्टि का सुख और स्पर्श का सुख का अपना अनूठा आनंद है जिसमें दोनों ही आनंदित होते हैं ,~~~~~~~"प्रेम " ईश्वर का दिया उपहार है चिन्तन हैं, मनुहार है , प्रेम को परिभाषित करना या गढ़ना बहुत कठिन है , स्पर्श का सुख ,दृष्टि का सुख , मिलन का सुख और वियोग का सुख सारे रसों से सराबोर है प्रेम। सावन की पहली बूंदों जैसा ~~~~~

प्रेम शब्द जब आचरण से मंडित होता है तो वह जप और मंत्रों की शक्ति प्राप्त कर लेता है ..हमारे विचार ही हमारे शब्द बनते है ... शब्दों से भाव पनपता है भाव ही कर्म और प्रेम की रचना करते हैं ह्रदय के निर्मल मन से जो सुर निकलेंगे वे अतभुत गगनगामी तुल्य होंगे !!!

मुझे तो प्रेम प्रकृति के हर रंग में दिखता है " तुम्हारे प्रेम को पढ़ने की सामर्थ्य मुझमें है , बस तुम मूक रहो प्रशांत सागर से, मेरी शब्द लहरियाँ तरंगों सी, पूनम - अमावस के ज्वार - भाटे सी, क्षण - क्षण तुमसे टकराकर, आंदोलित कर तुम्हें गतिमान करते रहेंगी और तुममें प्रेम को संचारित करते रहेंगी। " ......:))))

===== © वंदना दुबे
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Photo: " प्रेम " मन को अलंकृत करता है। कनक सी चमक, अलौकिक दिव्यता और मन का आवरण है , प्रेम में रहना या जीना एक शाश्वत अतुल्य आनंद का अनुभव है, यह व्यक्तित्व की शुद्धतम स्थिति, जिसमें संवेदनायें - भावनायें एक दूसरे से जुड़ी रहती है, भावों को समझने की परख होनी चाहिये। प्रेम मौन भी हो तो दॄष्टि का सुख और स्पर्श का सुख का अपना अनूठा आनंद है जिसमें दोनों ही आनंदित होते हैं ,~~~~~~~"प्रेम " ईश्वर का दिया उपहार है चिन्तन हैं, मनुहार है , प्रेम को परिभाषित करना या गढ़ना बहुत कठिन है , स्पर्श का सुख ,दृष्टि का सुख , मिलन का सुख और वियोग का सुख सारे रसों से सराबोर है प्रेम। सावन की पहली बूंदों जैसा  ~~~~~

प्रेम शब्द जब आचरण से मंडित होता है तो वह जप और मंत्रों की शक्ति प्राप्त कर लेता है ..हमारे विचार ही हमारे शब्द बनते है ... शब्दों से भाव पनपता है भाव ही कर्म और प्रेम की रचना करते हैं ह्रदय के निर्मल मन से जो सुर निकलेंगे वे अतभुत गगनगामी तुल्य होंगे !!!

 मुझे तो प्रेम प्रकृति के हर रंग में दिखता  है " तुम्हारे प्रेम  को पढ़ने की सामर्थ्य मुझमें है , बस तुम मूक रहो प्रशांत सागर से, मेरी शब्द लहरियाँ तरंगों सी, पूनम - अमावस  के ज्वार - भाटे सी, क्षण - क्षण तुमसे टकराकर, आंदोलित कर तुम्हें गतिमान करते रहेंगी  और तुममें प्रेम को संचारित  करते रहेंगी। "  ......:)))) 

===== © वंदना दुबे