Saturday, 2 August 2014


यादों का सिलसिला ~~
बार - बार चला जाता है
क्यूँ ???
बीते कल की ओर
और
बेसाख्ता !!!
इन नयनन में
नमी ,
कुछ ख़ुशी की
कुछ गम की
कुछ आशायें !!!
आने वाले कल की

Continuation of memories ~ ~
Again and again goes
Why???
Yesterday the
And !!!
In these eyes
Humidity,
Some pleasure
Some of sorrow
Some expectations!!
Of tomorrow ~
Vandana ~
 
Photo: यादों का सिलसिला ~~
बार - बार चला जाता है
क्यूँ ???
बीते कल की ओर
और
बेसाख्ता !!!
इन नयनन में 
नमी , 
कुछ ख़ुशी की 
कुछ गम की 
कुछ आशायें !!!
आने वाले कल की 

Continuation of memories ~ ~ 
Again and again goes 
Why??? 
Yesterday the 
And !!! 
In these eyes 
Humidity, 
Some pleasure 
Some of sorrow 
Some expectations!! 
Of tomorrow ~ 
Vandana ~

मेरे मनहर ..!!!
जब कभी आप
नींद में मुझे
बिना मिले ही
बिना देखे ही
छू जाते हो.........

कपकपा जाती हूँ मैं
अपने हीं चादर में उलझकर .........
ना जाने कितने
सतरंगी सपने
मेरे नयनों में
समा जाते हैं........

मुझे भी पता है
उन सपनों की
कोई मंजिल नहीं है...........

ये रिश्ते ,
पानी में चलने जैसे
पवन में उड़ने जैसे
धरती अम्बर क्षितिज से
दृष्टि गोचर अंतहीन
सागर की लहरों का नाद जैसे ~~~~~~

.......

नींद खुलते ही
तुम्हारी छबि विलुप्त
हो जाती है
नयन डबडबा जाते हैं.......

काश !!!
ऐसा हो पाता और
हम दोनों के मध्य होती
मौन अभिव्यक्ति ……

-- © --
वंदना दुबे —
Photo: मेरे मनहर ..!!! 
जब कभी आप 
नींद में मुझे 
बिना मिले ही 
बिना देखे ही 
छू जाते हो.........

कपकपा जाती हूँ मैं
अपने हीं चादर में उलझकर .........
ना जाने कितने 
सतरंगी सपने 
मेरे नयनों में 
समा जाते हैं........

मुझे भी पता है
उन सपनों की
कोई मंजिल नहीं है...........

ये रिश्ते ,
पानी में चलने जैसे 
पवन में उड़ने जैसे 
धरती अम्बर क्षितिज से 
दृष्टि गोचर अंतहीन 
सागर की लहरों का नाद जैसे ~~~~~~

.......

नींद खुलते ही 
तुम्हारी छबि विलुप्त 
हो जाती है 
नयन डबडबा जाते हैं....... 

काश !!!
ऐसा हो पाता और 
हम दोनों के मध्य होती 
मौन अभिव्यक्ति ……

-- © --
वंदना दुबे —

Feeling Depressed ..........   

कानपुर हत्याकांड पर मेरी कलम से -----------

हमारे जन्म - सम्बन्ध या रक्त - सम्बन्ध पीढ़ी दर पीढ़ी होते हैं, उन्हें सहेजना हमारा परम कर्त्तव्य है हमारे आचार, विचार, व्यवहार, संस्कार और धर्म को अगले आने वाले अपने कुल को सम्प्रेषित करना हमारा नैतिक दायित्व है, और हम सब इसका पूरी तन्मयता से निर्वहन भी करते हैं, जैसी नीव हम डालेंगे !!! रिश्तों की जड़ता भी उतनी मजबूत होगी।

इसके विपरीत मित्रता और प्रेम के शाश्वत सम्बन्ध हमारे निर्मित किये होते हैं, जिनमें भावनायें, सम्वेदनायें, आत्मीयता, प्रघाड़ता होती है जो क्षण - क्षण हमें खुशियाँ और शांति प्रदान करती हैं, और सुखद स्वप्नों की सैर कराती है , ये रिश्ते पूर्णतया ऐक्छिक होते हैं, दार्शनिक दृष्टि डालें तो समाज इन रिश्तों के लिये उदात्त कभी भी नही रहा, हमेशा समाज ने जाति, पंथ और आर्थिक स्तर में संबंधों को जकड़ना चाहा।
समाज के इस त्रुटिपूर्ण रवैये से प्रेम की सहजता, निर्मलता, पवित्रता, नैसर्गिता प्रभावित होती है और होती रहेगी। समाज में फैली हुयी सारी विपरीत परिस्थितियां विरोधाभास और गलत व्याख्याओं के कारण ही सामने आ रही हैं, समाज के डर से प्रेम को छिपाना सीमा तोड़ने का डर न जाने कितनी मासूमों की जिंदगियां तबाह कर रहा है। कृपया अपने विचार भी दें !!!!
_/\_

© ~~~ Vandana Dubey
 —
Photo: Feeling Depressed  .......... :( :( :( 

कानपुर हत्याकांड पर मेरी कलम से -----------

हमारे जन्म - सम्बन्ध या रक्त - सम्बन्ध पीढ़ी दर पीढ़ी होते हैं, उन्हें सहेजना हमारा परम कर्त्तव्य है हमारे आचार, विचार, व्यवहार, संस्कार और धर्म को अगले आने वाले अपने कुल को सम्प्रेषित करना हमारा नैतिक दायित्व है, और हम सब इसका पूरी तन्मयता से निर्वहन भी करते हैं, जैसी नीव हम डालेंगे !!! रिश्तों की जड़ता भी उतनी मजबूत होगी। 

इसके विपरीत मित्रता और प्रेम के शाश्वत सम्बन्ध हमारे निर्मित किये होते हैं, जिनमें भावनायें, सम्वेदनायें, आत्मीयता, प्रघाड़ता होती है जो क्षण - क्षण हमें खुशियाँ और शांति प्रदान करती हैं, और सुखद स्वप्नों की सैर कराती है , ये रिश्ते पूर्णतया ऐक्छिक होते हैं, दार्शनिक दृष्टि डालें तो समाज इन रिश्तों के लिये उदात्त कभी भी नही रहा, हमेशा समाज ने जाति, पंथ और आर्थिक स्तर में संबंधों को जकड़ना चाहा।
समाज के इस त्रुटिपूर्ण रवैये से प्रेम की सहजता, निर्मलता, पवित्रता, नैसर्गिता प्रभावित होती है और होती रहेगी। समाज में फैली हुयी सारी विपरीत परिस्थितियां विरोधाभास और गलत व्याख्याओं के कारण ही सामने आ रही हैं, समाज के डर से प्रेम को छिपाना सीमा तोड़ने का डर न जाने कितनी मासूमों की जिंदगियां तबाह कर रहा है। कृपया अपने विचार भी दें !!!!
_/\_

© ~~~ Vandana Dubey

सुबह - सवेरे
स्वच्छंद
साँवरे - सावन
की सर्र - सर्र सरसराती
हवाओं के साथ
जल - बिन्दु 
भिगो गयी मुझे ~~~
कि अचानक
मौसम ने ली
अंगराई !!
सूरज ने इंद्रधनुषी छटा बिखराई
यूँ लगा ~~~
आचमन कर लिया मैंने
तुम्हें धारण कर लिया मैंने
मानों - मौन मधु
सरस हो गया !!!

===== © वंदना दुबे
 —
Photo: सुबह - सवेरे
 स्वच्छंद
साँवरे  - सावन 
की सर्र - सर्र सरसराती 
हवाओं के साथ 
जल - बिन्दु 
भिगो गयी मुझे ~~~
कि  अचानक 
मौसम ने ली 
अंगराई !!
सूरज ने इंद्रधनुषी छटा बिखराई 
यूँ लगा ~~~
आचमन कर लिया मैंने 
तुम्हें धारण  कर लिया मैंने 
मानों - मौन मधु
 सरस हो गया !!!

===== © वंदना दुबे

Thursday, 17 April 2014


फ़िर वही कुहासा
फिर थर -थर थरथराई धरा
बसंत का गमन होने को है
लगता है शिशिर ने दस्तक दी
मौसम ने ली फिर अंगराई !!!

फूटते हैं
अंतर्मन से
नित
नये - नये
प्रेम के पर्याय
उतारती
उन्हें कोरे पन्नों में
जो
तुम पर अप्रभावी आज भी........

~~~~~
और तुम उतने ही
पाषाणवत रहे
" मनहर "



वंदना दुबे ~~

एक ऐसा रिश्ता ढूढ़ती
नित -दिन तुमसे
जो हो लबालब
विश्वास
प्रेम
सान्निध्य 
जो अनूठा अटूट रहता आजीवन ~~

वंदना दुबे ©